17 : 30 | Patna
अर्थशिला पटना प्रस्तुत करता है एक बेहद अनूठी प्रदर्शनी दास्तान-ए-पटना टॉकीज़ जिसमें, पटना के शुरुआती सिनेमा घरों के सफरनामे, उनकी सुनहरी यादें और बदलते दौर की झलकियां हैं।
📅 23 मई 2026 | शनिवार
🕟 शाम 5:30 बजे से
क्या आपको याद है जब फिल्मों का जादू देखने के लिए लोग दूर-दूर से बैलगाड़ियों और ट्रेनों में बैठकर पटना आया करते थे? जब थिएटर्स में जय संतोषी माता फिल्म चलने पर परदे पर सिक्कों की बारिश होती थी?
पटना के शहरी मिजाज और संस्कृति को गढ़ने में यहाँ के सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों का एक बेहद खास योगदान रहा है। एल्फिन्स्टन, रीजेंट, रूपक, वीणा से लेकर चाणक्य और अप्सरा तक, ये सिर्फ थिएटर्स नहीं, बल्कि यादों का कारवां हुआ करते थे।
आइए, उस दौर को फिर से महसूस करें जब सिनेमा सिर्फ़ मनोरंजन नहीं, शहर की सामूहिक धड़कन हुआ करती थी।